___यादें ___
इस झूर्रियों वाले चेहरे संग तू ...
जब आंगन में खाट लगाएगी ...
निंदिया तुझको तड़पायेगी ...
जब तू मंद-मंद मुस्कायेगी ...
तब सिरहाने तकिये संग तू होले-होले रो लेगी ...
जब चालाकी से यादों के पिंजरे खोलेगी ...
उन यादों की पुरवाई भी तेरे कानों में बोलेंगी ...
जब तू ना सो लेगी,ना रो लेगी ...
तब टूटे तारों से तू बोलेंगी ...
कब तक इन यादों को इस तकिये संग खोलेगी ...
तब खद्योत बनकर आऊंगा ...
तुझको रोशन यूँ कर जाऊंगा ...
जिते जी तो ना कर पाऊंगा ...
वो मरकर करने आऊंगा ...
उन पिंजरे वाली यादों को अपने हाथों से नहलाऊंगा ...
उसके हर एक किस्से को राख में खुद बनाऊंगा ...
उस झुर्रियों वाले चेहरे को चाँद फिरसे मैं बनाऊंगा ...
एक बार फिर तुझको में बचपन में ले जाऊंगा ...
सिरहाना तेरे काँधे को फिर से मैं बनाऊंगा ...
औऱ अनकही सारी बातें तेरे कानों में भर जाऊंगा ...
जब तू अनकही बातों के पन्ने छुप-छुप सब से खोलेंगी ....
तब उस पायल की आवाजें फिर से बोलेंगी ...
जब सारी यादें मिलकर साथ में मुझको लायेंगी ...
तब विरहा की अग्नि तुझको पल-पल यूँ जलायेगी ...
तब आग़ोश में मेरे फिर से तू आना चाहेगी ...
लेकिन छोटे से परिवार की चिन्ता तब भी तुझे सतायेगी ...
फिर तू इन सारी बातों को मिट्टी-मिट्टी करना चाहेगी ...
तब तू मिट्टी होकर भी मुझमें मिलना चाहेगी ...
तब मैं आऊंगा...
मैं आऊंगा...
तुझको मैं ही ले जाऊंगा !!!
एक दिन भोर सवेरे,जब तू उठ ना पाएगी ...
मृत्युशैया पर लेटी तू मंद-मंद मुस्कायेगी ...
जब अपने तुझे जलाएंगे ...
तब में तुझको गले लगाऊंगा ...
जब तू मिट्टी में मिल जाएगी ...
तब तू उसमें मुझको ही पाएगी ...
तब आसमान में मंड़प फिर से लगाऊंगा ...
फिर तेरी इच्छा से तुझसे ही में ब्याहूँगा ...
फिर साँसों में घुलकर ...
यूँ रोम-रोम मैं बस जाऊंगा ...
तेरे संग ही अपनी दुनिया बसाउंगा !!


1 Comments:
ये शब्द मन मैं उतर गये।।
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